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सम्मेदाचल एकमात्र ऐसा ऑनलाइन अख़बार है जिसपर समस्त जैन तीर्थ स्थलों की जानकारी उपलब्ध हैA
 
 
हमारे बारे में  
सम्मेदाचल जैन धर्म को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए स्थापित पाक्षिक समाचार पत्र है जिसकी स्थापना सन् 2005 में की गई। लगभग 10-सावन का लुफ्त उठाते हुए सम्मेदाचल जैन संप्रदाय को लीड कर रहा है। यह अखबार जैन धर्म के समाचार, लेख एवं साधु-साध्विओं की सम्पूर्ण जानरकारियों का पिटारा ही नहीं बल्कि ज्ञान मनोरंजन, सूचना तथा शिक्षा का पर्याय भी बन चुका है। जैन समाज में इसकी बढ़ती मांग निश्चित-तौर पर इस अखबार के महत्वपूर्ण होने की ओर इशारा कर रहा है।
  स्थापना
सम्मेदाचल की स्थापना नवम्बर 2005 में हुई। सम्मेदाचल के प्रथम अंक का विमोचन परम पूज्य आचार्य 108 श्री ज्ञान सागरजी महाराज के कर-कमलों से कैलाश नगर दिल्ली में हुआ। पिछले 10 वर्षों में सम्मेदाचल ने अपनी निरन्तरता बनाये रखते हुए प्रत्येक अंक प्रकाशित किया है। 10 वर्षों में पूरे 240 अंक प्रकाशित हुए हैं।
विकास एवं विस्तार
सम्मेदाचल का नवम्बर 2005 में प्रकाशन प्रारम्भ किया गया। प्रथम अंक मात्रा चार पृष्ठों का व ब्लैक एण्ड व्हाईट था। धीरे-धीरे इसमें प्रकाशित सामग्री भी बढ़ी तथा इसकी प्रसार संख्या भी। चार पृष्ठ से आठ, पिफर बारह पृष्ठों की सामग्री प्रकाशित हो रही है जिसमें पहले कभी-कभी रंगीन पृष्ठ आते थे, पिफर रंगीन पृष्ठों की संख्या बढ़ी और अब सम्मेदाचल में चार रंगीन पृष्ठ चिकने कागज पर व 8 ब्लैक एण्ड व्हाईट पृष्ठ कुल 16 पृष्ठ प्रत्येक अंक में प्रकाशित किये जाते हैं। अनेक अवसरों पर पृष्ठों की संख्या बढ़कर चोबीस तक हो जाती है।
सम्मेदाचल में प्रकाशित सामग्री, गैटअप और मुद्रण की प्रशंसा अनेक अवसरों पर सुनने में आती है।
प्रसार
सम्मेदाचल जो एक हजार की संख्या में प्रकाशित होना शुरू हुआ था, वर्तमान में 10 से 12 हजार प्रतियाँ सम्मेदाचल की प्रत्येक पक्ष में प्रकाशित होती हैं। सम्मेदाचल मेरठ की सीमाओं से निकलकर उ. प्र., उत्तराखण्ड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के अनेक शहरों में पहुँचता है तथा जैनत्व के गौरव को बढ़ा रहा है।
स्वतंत्रा, निष्पक्ष एवं निर्भीक
सम्मेदाचल ने अपनी स्थापना काल से ही अपनी स्वतन्त्रा, निष्पक्ष एवं निर्भीक छवि को बनाये रखा है। सम्मेदाचल संतवाद, पंथवाद, सम्प्रदायवाद से उफपर उठकर जैन समुदाय की सभी पंथों, आमनाओं, सम्प्रदायों को साथ लेकर चलने वाला एक अद्-भुत पत्र है।
सम्मेदाचल किसी संस्था, साधु, तीर्थ या व्यक्ति विशेष से नहीं बंधा । अपनी स्वतन्त्रा और निष्पक्ष छवि के द्वारा देशभर के जैन समाज में एक प्रतिष्ठा कायम की है। सम्मेदाचल द्वारा समाज की अनेक कुरीतियों पर की गई निर्भीक टिप्पणियों का असरकारी प्रभाव दृष्टिगोचर हुआ है।
साधु-संतों का आशीर्वाद
सम्मेदाचल को अनेक साधु-संतों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त हुआ। परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागरजी महाराज ने तो स्वयं अपने कर-कमलों से प्रथम अंक का विमोचन किया था। परम पूज्य आचार्य श्री विद्या भूषण सन्मति सागरजी महाराज, आचार्य श्री बाहुबली जी महाराज, आचार्य श्री ज्ञान भूषण जी, आचार्य श्री निर्मल सागरजी, आचार्य श्री चैत्यसागरजी, आचार्य श्री भारत भूषण जी, आचार्य श्री विनीत सागरजी, आचार्य श्री दर्शन सागरजी, आचार्य श्री निशंक भूषण जी, आचार्य श्री दया सागरजी, ऐलाचार्य श्री वसुनन्दी जी, ऐलाचार्य श्री श्रुतसागरजी, ऐलाचार्य श्री क्षमाभूषण जी, उपाध्याय श्री नयन सागरजी, क्रान्तिकारी संत श्री तरुण सागरजी, जंगल वाले बाबा श्री चिन्मय सागर जी, परम पूज्य मुनि सौरभ सागरजी, मुनि श्री निर्वाण भूषण जी, मुनि श्री विराग ट्टषि जी, मुनि श्री क्षीर सागरजी, गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी, माँ श्री कोशल जी सहित अनेक आचार्य, साधुवृन्द एवं आर्यिका माता जी का आशीर्वाद सम्मेदाचल को प्राप्त हुआ।
परम पूज्य आचार्य श्री विजयरत्न सुन्दर सूरीश्वर जी, भीष्मपितामह सलाहकार श्री सुमति मुनि जी, आचार्य श्री ज्ञानचंद जी, युवाचार्य श्री विशाल मुनि जी सहित अनेक संतों का विशेष आशीर्वाद भी सम्मेदाचल को प्राप्त हुआ।
सम्मेदाचल ने सभी साधु-सन्तों के प्रति समर्पित रहकर, उनकी कठोर चर्या एवं गम्भीर उपदेशों के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण कार्य किया है। सम्मेदाचल किसी एक सन्त से बंधकर नहीं अपितु सभी सन्तों का अपना प्रिय समाचार-पत्रा है।
धर्म एवं साधुओं के प्रति श्रद्धा बढ़ाने में भूमिका
सम्मेदाचल ने आम-जन को धर्म का मर्म व साधुओं की चर्या का भान कराके उनके प्रति श्रद्धा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। घर-घर में जिनागम और जैन साधुओं की वाणी पहुँचाकर धर्म के प्रति जागृति पैदा करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
सभी आमनाओं का पत्र
सम्मेदाचल ने दिगम्बर-श्वेताम्बर और इनसे जुड़ी सभी धराओं के समाचारों को समान महत्व के साथ प्रकाशित किया है। किसी भी सम्प्रदाय की प्रत्येक महत्वपूर्ण घटना को सम्मेदाचल में प्रमुखता से स्थान दिया गया है। इसी कारण से सम्मेदाचल सभी सम्प्रदायों में समान रूप से लोकप्रिय है।

सामाजिक सम्प्रदायों के निराकरण में सहयोग
सम्मेदाचल ने समाज की समस्याओं और कुरीतियों के सम्बन्ध् में जागृति लाने का बीड़ा उठाया है। देश की समस्त संस्थाओं, श्रेष्ठियों, समाज नेताओं व साधु वर्ग का ध्यान समाज की गम्भीर समस्याओं की ओर आकृष्ट करने का कार्य सम्मेदाचल द्वारा निरन्तर किया जा रहा है।
सम्मेदाचल द्वारा समाज के निर्बल वर्ग की समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर समाज का ध्यान आकृष्ट करने का कार्य किया गया है, जिससे समाज में जागृति आनी शुरू हुई है। निर्धन बच्चों की उच्च शिक्षा, चिकित्सा व गरीब कन्या विवाह जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सम्मेदाचल ने समाज को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। अनेक स्थानों पर इसका प्रभाव भी देखने में आया है। विशेष कर साधु वर्ग जो पहले केवल धार्मिक आयोजनों की ही बात करते थे। आज सामाजिक समस्याओं को भी उठाने लगे हैं। इस दिशा में सम्मेदाचल का प्रयास अनवरत जारी रहेगा।

धार्मिक, सामाजिक समस्याओं एवं कुरीतियों पर प्रहार
सम्मेदाचल ने धार्मिक, सामाजिक, समस्याओं एवं कुरीतियों पर गहन प्रहार किया है। साधुओं के विहार में आ रही कठिनाइयों के समाचारों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। तीर्थों की समस्याओं व नेतृत्व की उदासीनता से लेकर मंदिरों में बढ़ती चारी और असुरक्षा को लेकर निरन्तर समाज का ध्यान आकृष्ट करके उपयुक्त सुझाव दिये हैं।
धार्मिक आयोजनों की बढ़ती संख्या और उनमें हो रहे अपव्यय को लेकर सम्मेदाचल ने निरन्तर समाज का ध्यान आकृष्ट किया है। अनावश्यक नवमंदिर निर्माण और वैभव प्रदर्शन के कारण आने वाली कठिनाइयों को सम्मेदाचल ने निर्भीकता के साथ समाज के सम्मुख रखा है। इसका प्रभाव है कि समाज के बु(िजीवी वर्ग ने इस दिशा में ¯चतन प्रारम्भ किया है तथा सामाजिक चेतना जागृत हो रही है।

सामाजिक संस्थाओं में जागृति
सामाजिक संस्थाओं में जागृति- सम्मेदाचल ने देश की सभी बड़ी जैन संस्थाओं के विषय में समय-समय पर समाज को अवगत कराने का कार्य किया है। इसके पफलस्वरूप संस्थाओं के प्रति समाज में जागृति आई है तथा संस्थाओं के नेतृत्व वर्ग में भी सामाजिक समस्याओं के प्रति जागृति आनी प्रारम्भ हुई है। अनेक संस्थाओं द्वारा समाजहित की अनेक योजनाओं का प्रारम्भ किया जा रहा है तथा सामाजिक संस्थाएं धार्मिकता में आगे बढ़कर सामाजिकता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। संस्थाओं में पदासीन व्यक्ति भी पहले से अध्कि सक्रिय हुए हैं।

विवाह समारोह की कठिनाइयों पर लेख
सम्मेदाचल द्वारा वर्तमान में जो समस्या प्रमुखता से उठाई जा रही है वो है विवाह समारोह में बढ़ता खर्च और मध्यम वर्ग की कठिनाई। विवाह समारोह सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। समाज के ध्नाढ्य वर्ग द्वारा विवाह समारोह में अपार ध्न व्यय किया जा रहा है जिसकी देखा-देखी मध्यम वर्ग में भी विवाह समारोह का खर्चा बहुत बढ़ गया है। मध्यम वर्ग की शादी में होने वाले खर्च का आधे से अध्कि पैसा टैण्ट-खाना, सजावट, दिखावा-प्रदर्शन में खर्च हो जाता है। ऐसे में मध्यम वर्ग को जो कठिनाइयाँ आ रही हैं, सम्मेदाचल ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रखा है तथा समाज को जागृत करने का प्रयास किया जा रहा है। इस सम्बन्ध् में अनेक सुझाव भी सम्मेदाचल द्वारा दिये गये हैं।
रात्रि विवाह निषेष के सम्बन्ध् में भी सम्मेदाचल द्वारा जागृति पैदा करने का कार्य प्रारम्भ किया गया है।

अहिंसा एवं शाकाहार
अहिंसा एवं शाकाहार- सम्मेदाचल द्वारा अहिंसा एवं शाकाहार के प्रचार-प्रसार का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जैन ध्र्म का मूल सिद्धान्त अहिंसा एवं भगवान महावीर के ‘जीयो और जीने दो’ के सिद्धान्त को घर-घर में पहुँचाने का बीड़ा सम्मेदाचल ने उठाया है। अहिंसा एवं शाकाहार के प्रति पूर्णतया सम£पत सम्मेदाचल में इन विषयों को लेकर समाचारों, लेखों एवं सूचनाओं का प्रकाशन निरन्तर किया जाता है।

रोचक सामग्री
सम्मेदाचल में धार्मिक एवं सामाजिक के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की रोचक सामग्री भी प्रकाशित की जाती है। सामग्री में विविध्ता के कारण सम्मेदाचल बच्चे, बूढ़े, युवा, महिला सभी का पसन्दीदा पत्रा है। गम्भीर लेखों के साथ-साथ संतवाणी, तीर्थ दर्शन, कैरियर, संस्कारों के लेख के साथ-साथ, कहानी, चुटकुले, सौन्दर्य सामग्री, खान-पान, स्वास्थ्य आदि से सम्बन्ध्ति सामग्री का प्रकाशन किया जाता
है। वास्तु-ज्योतिष, घरेलू उपचार आदि विषयों पर भी समुचित सामग्री का प्रकाशन करने से सम्मेदाचल पूरे परिवार के लिए उपयोगी बन गया है।

परिवार जोड़ो अभियान
जैन समाज के युवक-युवतियों के विवाह में आ रही कठिनाइयों को दृष्टिगत रखते हुए सम्मेदाचल द्वारा परिवार जोड़ो अभियान चलाया गया है। इसके अन्तर्गत जैन युवक-युवतियों के परिचय, सम्मेदाचल में निरन्तर प्रकाशित किये जाते हैं। जिससे जैन समाज के लोगों को उचित रिश्ता ढूंढने में भारी सुविध मिल रही है। सम्मेदाचल में प्रकाशित रिश्तों में से अभी तक लगभग पाँच सौ रिश्ते जुड़ चुके हैं। सम्मेदाचल का उद्देश्य है कि कम खर्च में अच्छा रिश्ता मिले तथा जैन समाज के लड़के-लड़कियाँ अपने ही समाज में रहे। इस दिशा में सम्मेदाचल के प्रयासों को समाज के हर वर्ग ने सराहा है।

परिचय सम्मेलनों का आयोजन
जैन युवक-युवतियों के लिए उचित रिश्ता तलाश करने हेतु सम्मेदाचल द्वारा परिचय सम्मेलनों का आयोजन भी किया गया। दिगम्बर जैन महासमिति उ. प्र. उत्तरांचल के साथ मिलकर दो बार परिचय सम्मेलन का आयोजन किया जा चुका है। विशाल स्तर पर आयोजित सम्मेलनों का भारी लाभ समाज को मिला। इन सम्मेलनों के माध्यम से अनेक रिश्ते भी जुड़े।

सम्पादकीय आल ेख
सम्पादकीय आलेख- सम्मेदाचल में प्रकाशित सम्पादकीय आलेखों को सर्वत्रा सराहना मिली है। अनेक सम्पादकीय आलेखों को देश के अन्य समाचार पत्रा-पत्रिकाओं ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। सम्पादकीय आलेखों के माध्यम से उठाई गई ज्वलंत समस्याओं व सुझावों का प्रभाव समाज में देखने को मिला है।
सम्पादकीय आलेखों के माध्यम से समाज को संस्कारित, जागृत एवं उन्नतिशील बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किये जाते हैं।

विशेषांक
सम्मेदाचल द्वारा अनेक अवसरों पर विशेषांकों का प्रकाशन किया गया तथा सम्मेदाचल के विशेषांकों को भरपूर सराहना मिली। क्षमावाणी, दीपावली, महावीर जयंती पर तो विशेषांकों का प्रकाशन प्रतिवर्ष होता ही है। साथ ही महलका, ट्टषभांचल, वहलना, हस्तिनापुर आदि तीर्थों के वा£षकोत्सव पर भी सम्मेदाचल के विशेषांक प्रकाशित किये जाते हैं। इससे समाज में धार्मिक चेतना व तीर्थों के प्रति रुचि जागृत करने में भारी लाभ मिलता है।
सम्मेदाचल द्वारा अक्षय तृतीया के पर्व पर प्रकाशित होने वाले विशेषांक को भी विशेष सराहना मिलती सम्मेदाचल द्वारा तपस्वी सम्राट् आचार्य सन्मति सागरजी पर प्रकाशित विशेषांक व तमिलनाडु यात्रा का विशेषांक संग्रहणीय बन गये तथा प्रशंसा का कारण बने। अनेक साधुओं के दीक्षा दिवस पर प्रकाशित विशेषांक सम्मेदाचल की ध्रोहर बन गये हैं।

सम्मेदाचल पुरस्कार समारोह
सम्मेदाचल पुरस्कार समारोह- सम्मेदाचल द्वारा जैन समाज के तन-मन-ध्न से समर्पित रूप से कार्य करने वाले महानुभावों को सम्मानित करने के लिये सम्मेदाचल पुरस्कार प्रदरान किये जा रहे हैं 30 दिसम्बर 2012 को मेरठ में आयोजित एक भव्य समारेाह में 4 महानुभावों को जैन शिरोमणी, दो महानुभावों को समाज भूषण व 2 महानुभावों को तीर्थ भक्त पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मेदाचल के इस प्रयास की सर्वत्रा सराहना हुई तथा इस वर्ष यह आयोजन 9 पफरवरी 2014 को आयोजित किया जा रहा है। जिसमें समाज के लिये विशिष्ट कार्य करने वाले महानुभावो को अलंकृत किया जायेगा।

ट्टषभांचल पुरस्कार
पत्राकारित के क्षेत्रा में विशिष्ट योगदान के लिए 2009 का ट्टषभांचल पुरस्कार सम्मेदाचल के प्रधन सम्पादक नवनीत जैन को प्रदान करने उनके कार्यों की अनुशंसा की गई। अनेक साधु-सन्तों के सान्निध्य में सम्मेदाचल को सम्मानित किया गया है। अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण सम्मेदाचल जैन समाज के साधु वर्ग, नेतृत्व वर्ग, बु(िजीवी एवं आम समाज की प्राथमिकता है। सभी इसको पूरे चाव से पढ़ते हैं तथा आगामी अंक की टकटकी लगाकर प्रतीक्षा करते हैं।
सम्मेदाचल जिनवाणी, जिनागम, जिनध्र्म, अ¯हसा, शाकाहार, विश्वशांति के प्रचार-प्रसार के लिए कृत-संकल्प है। सम्मेदाचल समाज की आवाश है। सम्मेदाचल सबका है।

 
 
  सम्मेदाचल के सम्पादक मण्डल  
             
       
  श्री नवनीत जैन   सुमत कुमार जैन, सासनी   श्रीमति नुपुर जैन  
  प्रधान सम्पादक   मानद सम्पादक   मुख्य सहसम्पादक  
             
             
       
  पं0 सरमन लाल जैन शास्त्री   सुनील जैन ‘संचय’ ललितपुर   सुनील जैन ‘‘प्रसन्न’’ हटा  
  सहसम्पादक   सहसम्पादक
  सहसम्पादक  
             
             
         
  दिनेश कुमार जैन बुढ़ाना   रविन्द्र जैन पल्लवपुरम      
  उपसम्पादक   प्रभारी प्रचार प्रसार      
             
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